परमेश्वर से मुंह मत मोड़ो। एक दिन आप उनसे आमने-सामने मिलेंगे। मन फिराएं और यीशु मसीह को खोजें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। उन पर विश्वास करो, और आप अपने सभी पापों के लिए क्षमा प्राप्त करेंगे और परमेश्वर के साथ शांति प्राप्त करेंगे।

“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।“(यूहन्ना 3,16)

अद्भुत अनुग्रह

परमेश्वर ने उद्धार प्राप्त करने की कार्यविधि को इतना सहज बनाया है कि, सब उसे प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप यीशु में विश्वास रखने का निर्णय लेते हैं, तो परमेश्वर आपके पिता होंगे और आप उनके प्रिय संतान होंगे, और उनके सनातन स्वर्गिय राज्य का अंग बन जाएंगे। यीशु का बलिदान हमें परमेश्वर के पास वापस लाने का एकमात्र मार्ग था, क्योंकि पाप हमें उनसे अलग करता है। लेकिन यीशु हमारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए तैयार थे, उन्होंने हमारे दंड को अपने ऊपर लिया और वह क्रूस पर उसके लिए मर गए। हर कोई जो उन पर विश्वास करने का विकल्प चुनता है, उस पर दंड आज्ञा नहीं है इसीलिए वो  बचाया जाता है और वो सच्चा मसीह बन जाता है। परमेश्वर फिर आपको यीशु के माध्यम से देखते हैं और उनके सामने आपका कोई भी पाप या अपराध नहीं है। यह हम में से प्रत्येक के लिए परमेश्वर की ओर से एक मुफ्त उपहार है। यह अद्भुत अनुग्रह है; दोषी लोगों को निर्दोष ठहराने के लिए एक को बलिदान किया गया था।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। (यूहनना 1:12)

चेतावनी

हर एक व्यक्ति को परमेश्वर से दूर जाने के परिणाम जानने का अधिकार है। यह बताया जाना चाहिए कि, परमेश्वर उन सभी के प्रिय पिता हैं जिन्होंने यीशु को मुक्तिदाता के रूप में स्वीकार किया है, लेकिन यह भी बताया जाना चाहिए कि, जो उनसे दूर जाते हैं वे उन्हें एक दिन न्यायाधीश की तरह देखेंगे। उस समय कोई दूसरा मौका नहीं होगा, पछतावे की कोई संभावना नहीं होगी। बाइबिल के धर्म सिद्धान्त में मृत्यु के पश्चात् दो वैकल्पिक परिणामों के संबंध में कहा गया है;  परमेश्वर का राज्य या पीड़ा अथवा आशाहीन स्थान।

यीशु ने कहा; “जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। (मत्ती 10:28)

इस पृथ्वी पर आपने जो समय गुजारा है, मृत्यु पश्चात के काल की तुलना में यह समय आँख की पलक झपकने के समान हैं, फिर भी इस जीवन में विश्वास रखने के लिए आप जिसको चुनते हैं, वह आपका मृत्यु पश्चात का शाश्वत काल निर्धारित करता है। यह आपकी पसंद है जो निर्धारित करता है कि आप अनंत काल कहां बिताएंगे। यह सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है जिसे आपको कभी भी करना होगा, इसलिए कृपया इसे ध्यान से समझें।

यीशु ने कहा; यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? (मत्ती 16:26)

बस जैसे आप हैं

आपको मसीह होने के लिए क्या चाहिए? मसीह होना इस बारे में नहीं है कि आप क्या करेंगे या आपको क्या मिलेगा, बल्कि इस बारे में कि परमेश्वर ने क्या किया है और आपके लिए क्या करेंगे। यह इस बारे में भी नहीं हैं कि आप कितने अच्छे या बुरे थे, आपने अतीत में क्या किया था, या आप अंदर से कितना अच्छा महसूस करते हैं। यीशु के पास आओ जैसे आप हैं। यह एक सरल निर्णय है और उस निर्णय पर टिके रहना है, चाहे कुछ भी हो जाए।

“और जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वही उद्धार पाएगा।“ (प्रेरितों के काम 2:21)

यीशु ने कहा; “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।“ (मत्ती 11:28)

और; “क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है॥“ (लूका 19:10)

निर्णय लिजिए

लेकिन हर एक को निर्णय लेना है

यीशु ने कहा; जो मेरे साथ नहीं, वह मेरे विरोध में है; और जो मेरे साथ नहीं बटोरता, वह बिथराता है।” (मत्ती 12:30)

कोई व्यक्ति विलंब से निर्णय ले सक्या है और बुढ़ापे में मसीह के पीछे चल सकता है। वह संभव हैं. जब तक आप जीवित हैं, यीशु के पीछे चलने में कभी देर नहीं हैं। बल्कि, आप कितने बुढे हो जाओगे, आपकी मृत्यु कब होगी, या आप अपनी मृत्यु के लिए तैयार हो जाओगे, इसका आपको पता कभी नहीं होता। और जब आपकी मृत्यु होगी, तब अनंत जीवेन के सब द्वार बंद हो जाएंगे और उस समय कोई दूसरा अवसर नहीं होगा। उस समय बहुत ज्यादा देर हो चुकी होगी।

यह दृढ़ता से सलाह दी जाती है कि आप अपने जीवन में कभी भी सबसे महत्वपूर्ण मामले में देरी न करें।

“आज, यदि आप उसकी आवाज सुनोगे, तो अपना हृदय कठोर मत करना…” (इब्रानियों 3, 7-8)

सुरक्षा जाल

यीशु की ओर परिवर्तित होना उस व्यक्ती की तरह है जो जमीन से बहुत ऊंचाई पर एक रेखा पर चलता है (उदाहरण:-सर्कस में टाइट रोप वॉकर), और फिर नीचे एक सुरक्षा जाल बिछाने का निर्णय लेता है। उस जाल के बिना नीचे गिरना एक आपदा होगी। सुरक्षा जाल बिछाया होने के कारण फिसलने और नीचे गिरने पर वह व्यक्ती घायल नहीं होगा, बल्कि जाल के कारण बच जाएगा। और वह तो केवल फिरसे उठ खडे होने और फिर से शुरू होने की ही बात है।

यीशु वह सुरक्षा जाल हैं और उस जाल की शक्ती कोई भी नहीं तोड सकता।

इस प्रकार अब उनके लिये जो यीशु मसीह में स्थित हैं, कोई दण्ड नहीं है।(रोमियो 8:1)

लेकिन, जाल के बिना, यीशु के बिना, एक व्यक्ती का किया हुआ हर एक पाप और गलती की गिनती जिस दिन परमेश्वर सभी मानव जाती का न्याय करेंगे, उस ईश्वरीय निर्णय के दिन, की जाएगी। बाइबल के अनुसार, इसका परिणाम यह होगा कि, आप परमेश्वर का प्रेम और उनके राज्य से सनातन रूप से अलग हो जाओगे;

और मै तुम से कहता हूं, कि जोजो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। (मत्ती 12:36)

और सृष्टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं॥ (इब्रानियों 4:13)

जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है॥ (यूहनना 3:36)

मसीही बनो

मसीह बनने का आपका निर्णय आप प्रार्थना के द्वारा व्यक्त कर सकते हैं।

प्रार्थना करना मतलब परमेश्वर से बात करना है। वह आपको जानते हैं। आप निम्नलिखित प्रार्थना करें ऐसा हम सूचित करते हैं:

‘‘प्रिय यीशु! मुझे अपने जीवन में की हुई गलतियों के लिए खेद है। मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ। मुझे अपने पापों से मुक्ती दिलाने के लिए सूली पर चढने के लिए आपको बहुत धन्यवाद। कृपा करके मेरे जीवन में आएं और अपनी पवित्र आत्मा से मुझे भर दिजिए और मेरे साथ हमेशा रहिए। धन्यवाद यीशु, अमीन।’’

क्या यह प्रार्थना आपके ह्रदय की गहराइयों से निकलती है?
अगर हाँ, तो हम आपको प्रार्थना करने के लिए निमंत्रित करते हैं,
और यीशु के वचनों के अनुसार ,
वह आपके जीवन आएंगे।

मसीही होना

यीशु को उद्धारकर्ता मानना एक व्यक्ती को सौ फिसदी सही ठहराता है। परमेश्वर को आपसे क्या चाहिए, यीशु के बलिदान के द्वारा उन्होंने अपने आपको ही एक मुफ्त उपहार के रूप में तुम्हें सौपा हैं।

लेकिन परमेश्वर की यह भी इच्छा है कि, जो मसीही बन गया वह गलत से दूर होकर, और ज्यादा से ज्यादा यीशु की तरह बनकर सुधार करते हुए प्रगती करे; न्यायसंगत और बचाए जाने के उद्देश्य के लिए नहीं, क्योंकि आप उस चीज को खुद से प्राप्त नहीं कर सकते हैं और एक मसीही के रूप में आपको पहले से ही यह एक मुफ्त उपहार के रूप में दिया गया है। लेकिन क्योंकि आप परमेश्वर और यीशु के कृपा से बच गए हैं, जिन्होंने आपको उस समय बचाया था जब आप इसके लायक नहीं थे।

प्रगती करने के लिए एक मसीह होने के नाते, आप दो कदम आगे और एक कदम पीछे जाएंगे, और कभी कभी दो कदम पीछे जाकर एक कदम आगे बढ़ेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि हमेशा यीशु के निकट रहना और उनसे कुछ भी छिपाने की कभी कोशिश ना करना। अगर आपने कोई बात की है जो आपको गलत लगती है, तो वह कबूल करें और उनसे क्षमा माँगे। यीशु आपके सुरक्षा जाल होंगे । और जब तक आप जीवित हैं, आपको उनकी जरूरत रहेगी।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। (1 यूहनना 1:9)

हम आपको यह सलाह देते हैं कि, अपने स्थानिय क्षेत्र में आप भी एक अच्छे मसीही सभा/ चर्च का हिस्सा बनें; अन्य मसीहियों के साथ साहचर्य बनायें, परमेश्वर का वचन, भोज आदि साझा करें

अगर आपको बपतिस्मा नहीं दिया गया है तो हम आपको सलाह देते हैं कि आप मसीही धर्मगुरू या मसीही धर्मसभा से संपर्क करें और प्रभू यीशुके नाम से बपतिस्मा लें।

जैसे बाइबल बताती है: मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुमपवित्र आत्मा का दान पाओगे।(प्रेरितों के काम 2.38)

मसीहियात और धर्म

मसीह धर्म और अन्य धर्मों के बीच का एक प्रमुख अंतर:
अधिकांश धर्म ऐसे लोगों के बारे में हैं जो व्यक्तिगत बलिदान के माध्यम से एक दिव्य लक्ष्य प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

मसीह धर्म इसके विपरीत है, एक परमेश्वर के बारे में जो दुनिया से प्यार करते हैं और सभी मानव जाति का उद्धार करने के लिए अपने बेटे के माध्यम से खुद को बलिदान कर दिया।

केवल एक ही मार्ग

बाइबल के अनुसार, परमेश्वर के पास जाने का एकमात्र मार्ग केवल यीशु ही हैं। और कोई मार्ग नहीं है। आप एक अच्छा जीवन जी सकते हैं, और कितने ही अच्छे काम कर सकते हैं, लेकिन वे आपको परमेश्वर के निकट नहीं लाएंगे। एक अच्छे और दयालु व्यक्ती होने के बावजूद भी आपके मन और ह्रदय में पाप रहेगा। आप अपने को सही ठहराने में सक्षम नहीं होंगे या जब तक यीशु आपके पक्ष में ना हों तब तक आप परमेश्वर के साथ एक सच्चे रिश्ते में नहीं आ सकते हैं। आपको यह स्वीकार करना होगा कि आप पापी हैं और आपको यीशु के बलिदान की आवश्यकता है।

यीशु ने कहा: “मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।“ (यहूनना 14, 6)

“और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें॥“ (प्रेरितों के काम 4:12)

इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंतमेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। (रोमियो 3:23-24)

पुनरूत्थान के साक्षी

मानव पाप के लिए परमेश्वर ने जो बलिदान स्वीकार किया है, वह केवल यीशु का बलिदान है। और उन्होंने तीसरे दिन यीशु को मृतकों में से जीवित करके इस बलिदान की अपनी स्वीकृति की घोषणा की।

प्रेरित पॉल 500 से अधिक गवाहों को संदर्भित करते हैं जो यीशु को उनके पुनरुत्थान के बाद मिले, उनके शिष्यों के अलावा, और उनमें से अधिकांश 25 से अधिक वर्षों तक जीवित रहे। (1. कुरिन्थियों 15, 6)। और भी लोगों ने उनकी मौत देखी, जिसमें रोमन भी थे जिन्होंने उन्हें सूली पर चढ़ा दिया था।

पुनरूत्थान के पश्चात, येशू ने अपने शिष्यों से कहा:

ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों। तब उस ने पवित्र शास्त्र बूझने के लिये उन की समझ खोल दी। और उन से कहा, यों लिखा है; कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। तुम इन सब बातें के गवाह हो।“ (लूका 24:44-48)

यीशु के बारे में भविष्यवाणियाँ

यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान की भविष्यवाणी यीशु ने ऐसा होने से कई साल पहले स्वयं की थी। उनके जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान की भविष्यवाणी कई सौ साल पहले परमेश्वर के नबियों ने की थी। पुराने नियम में उद्धारकर्ता के बारे में कुल 48 भविष्यवाणियां हैं जिन्हें परमेश्वर ने दुनिया में भेजने का वादा किया था।

एक उदाहरण भविष्यवक्ता यशायाह है से जो यीशु मसीह के मनुष्य के रूप पैदा होने से 700 साल पूर्व का है। (निम्नलिखित मूल में से एक लघु उद्धरण है)

निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का माराकूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिथे उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।। (यशायाह 53:4-6)

अत्यधिक विस्तृत भविष्यवाणियाँ

मूसा के नियम, भविष्यद्वक्ताओं, और स्तोत्रों (पुराने नियम) में लिखी गई कई भविष्यवाणियां भी अधिक विस्तृत हैं। कुछ उदाहरण:

उसे एक मित्र (यहूदा) द्वारा धोखा दिया जाएगा और उसके लिए जितने पैसे का धोखा दिया जाएगा; चाँदी के 30 टुकड़े (भजन 41,10 और जकर्याह 11,12 ), उसकी मृत्यु के बाद इस धन का क्या उपयोग होगा; कुम्हार का मैदान (सपन्याह 11,13), उनके हाथ और पैर छिदवाए जाएंगे (क्रूस) (भजन 22,17), उसकी टांगें टोडी नहीं जाएंगी(भजन 34,21), जो क्रूस पर चढ़ाने के बाद अंत में एक मानक प्रक्रिया थी बजाय, उनकी पसली को एक भाले से छेदा जाएगा(जकर्याह 12,10) इस सहित कई अन्य विशिष्ट उदाहरण हैं। यह सब तब हुआ, जब इसकी भविष्यवाणी की गई थी और कई सौ साल पहले लिखा गया था (संदर्भ। मती 24,15 और 26,47-48 और 27,5-7, लुका 23,33, यहूनना  19,33-34)। उनके सूली पर चढ़ने और मृत्यु से संबंधित अधिकांश भविष्यवाणियाँ रोमनों द्वारा पूरी की गईं, जिन्हें इन पुरानी भविष्यवाणियों के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

सभी भविष्यकथनों के पूरा होने पर परमेश्वर ने पुष्टि की कि यीशु मसीह उद्धारकर्ता है जो उन्होंने शुरुआती दिनों में वादा किया था और वह पूरी मानव जाति के लिए वापस आ गए थे।

और मैं ने अब इस के होने से पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो। (यूहनना 14: 29)