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देरी संभव हैं ?

कोई एक धर्म परिवर्तन में देरी करके बुढापे में ख्रिश्चन होने का इच्छुक हो सकता हैं। वह संभव हैं. जब तक आप जिवीत हो, येशू के साथ होने में कभी देर नहीं हैं। बल्कि, आप कितने बुढे हो जाओगे, आपकी मृत्यु कब होगी, या आप अपनी मृत्यु के लिए तैयार हो जाओगे, इसका आपको पता कभी नहीं होता। और जब आपकी मृत्यु होगी, तब सब सनातनता के लिए दरवाजा बंद हो जाएगा और उस समय कोई दूसरा अवसर नहीं होगा। उस समय बहुत ज्यादा देर हो चुकी होगी।

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यह बड़ी तीव्रता से सिफारिश करनी चाहिए कि, आप के जीवन में विचाराधिन सबसे महत्वपूर्ण बात में देरी नहीं करनी चाहिए. येशू ने जैसे कहा:

"यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा?" (मत्ती 16, 26)

"अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। क्योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा।" (मत्ती 6, 19-21)

"उस ने उन से एक दृष्टान्त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्या करूं, क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं। और उस ने कहा; मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उन से बड़ी बनाऊंगा; और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह। परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं॥" (लूका 12, 16-21)

धर्म परिवर्तन में देरी यह सूचित करता हैं कि, भगवान ने आपके जीवन के लिए नियोजित मौके आप खो दोगे।.
इसके अलावा, आप ने येशू की ओर धर्म परिवर्तन किया तो आपका जीवन दुख:दायी कराने का इसको हेतू नहीं है, बल्कि उसके विपरीत हैं। उसने कहा;

"इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।" (मत्ती 6, 33)