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इस पृथ्वी पर आपने जो समय गुजारा हैं, मृत्यु पश्चात के काल की तुलना में यह समय आँख की पलक झपकने के समान हैं, फिर भी इस जीवन में विश्वास रखने के लिए आप जिसको चुनते हैं, वह आपका मृत्यु पश्चात का शाश्वत काल निर्धारित करता हैं। आप अपना मृत्यु पश्चात का काल कहाँ बिताएंगे इसका निर्धारण आपका ही निर्णय करता हैं। आप से लिया जाने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण निर्णय हैं, इसलिए इसके बारे में सावधानता से विचार करें।

वह क्या लेता है?

फ्लायर प्राप्त करनेवाली एक जवान महिला ने पूछा, ‘‘एक ख्रिस्ती होने के लिए क्या चाहिए?’’ एक ख्रिस्ती होना आप क्या करोगे या आप क्या पाओगे इसके बारे में नहीं है, बल्कि आपके लिए भगवान ने क्या किया हैं और क्या करेगा इसके बारे में हैं। अधोलिखित शब्द बाइबल में से है:

"परमेसवार को जगत से यीताना प्रेमे था की उसने अपने येकमात्र पुत्र को देदीया, ताकि हर वह अदीमी जो उसने विसवास रखता है, नष्ट न हो जाये बल्की उसे अन्नत जीवन मील जाये!" (यूहनना 3, 16)

"बचने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? धर्मप्रचारक पॉल ने उसे दवाब दिया; प्रभू येशू ख्रीस्त में विश्वास रखो, और तुम बच जाओगे।‘’ (कृती 16, 30-31और 33)

भगवान ने मोक्ष प्राप्त करने की कार्यविधि को इतना सहज बनाया हैं कि, सब उसे प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप येशू में विश्वास रखने का निर्णय लेते हो, तो भगवान आपके पिता होंगे और आप उनके प्रिय संतान, और उनके सनातन स्वर्गिय राज्य का अंग बन जाओगे। येशू का बलिदान भगवान के लिए हम सबको उसके पास वापस लाने का एकमात्र मार्ग था, कारण हमारे पाप हमें अलग करते हैं। लेकिन, येशू हमारे पाप अपने पर लेने के इच्छुक थे, हमारी शिक्षा भुगतने के लिए इच्छुक थे, और उसके लिए उन्होंने क्रॉस पर अपने प्राण त्याग दिए। इसलिए, वे सब जो उसमें विश्वास रखने का निर्णय लेते हैं, उनका न्याय होता हैं, वे बच जाते हैं और सच्चे ख्रिस्ती बन जाते हैं। पश्चात, भगवान येशू के द्वारा आपकी ओर देखते हैं और उनकी दृष्टी से आप किसी भी तरह के पाप या गलती से परे होते हैं। हम में से हर एक के लिए वह भगवान की एक मुफ्त भेंट हैं। यह एक आश्चर्यजनक वरदान हैं; अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए एक निरागस का बलिदान दिया गया।

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"क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।" (इफिसियों 2, 8)

"परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।" (यूहनना 1, 12)

जब येशू को सुली पर चढाया गया, तो उनकी दोनों बाजू में और दो व्यक्तियों को भी सुली पर चढाया गया था। उनमें से एक ने यह माना कि, वह केवल एक पापी ही नहीं, साथ ही में एक अपराधी भी था।

उसने येशू से कहा, ’’प्रभू आप जब अपने राज्य में आओगे तो मुझे याद कर लेना.’’ येशू ने उसे जवाब दिया, ’’निश्चित ही, मैं तुमसे कहता हूं, आज तुम मेरे साथ स्वर्ग में होगे।’’ (ल्युक 23, 42-43).


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