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येशू के प्रति पूर्वानुमान

येशू की मृत्यु और पुनरूत्थान इनके बारें में उन्होंने स्वयं ही वे दोनों घटनायें घटने के बहुत वर्षों पूर्व ही पूर्वकथन किया था। उनका जीवन, उनकी मृत्यु और पुनरूत्थान इनके बारे में सैकडों साल पूर्व ही भगवान के प्रेषितों ने पूर्वकथन किया था। पुराने उपदेश में कुल 48 भविष्यकथन हैं जिनमें भगवान ने संसार में भेजने का वचन दिए हुए रक्षक के बारे में बताया गया हैं।

एक उदाहरण हैं प्रेषित इसाह से, जो येशू ख्रीस्त का मानवजाती में जन्म होने से पूर्व लगबग 700 वर्ष पहले रहता था। (अधोलिखित मूल में से एक लघु उद्धरण हैं) :

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“निश्चय उस ने हमारे रोगोंको सह लिया और हमारे ही दु:खोंको उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामोंके हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिथे उस पर ताड़ना पक्की कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। हम तो सब के सब भेड़ोंकी नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभोंके अधर्म का बोफ उसी पर लाद दिया।।" (श्रेष्ठगीत 53, 4-6)


[उच्च विस्तृत भविष्यकथन]